Moral stories Best Instructive in Hindi | Positivethinks.in

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दोस्तों, हमने यहां स्पेशली बच्चो के लिए कुछ Moral Stories आप लोगों के साथ शेयर किया हैं। जिससे की आप अपने बच्चों को यह Moral Stories सुना कर उन्हें सही गलत की पहचान करना सीखा सकें। और आप सभी जानते है की बच्चों को कहानियां बहुत पसंद होती है और वे इसे ध्यान से सुनते और समझते भी है। यही एक सबसे अच्छा जरिया है, अपने बच्चों को कुछ सिखाने का उन्हें सही दिशा दिखाने का। इसलिए मैंने आप लोगो को के लिए कुछ Moral Stories शेयर की है।

Moral stories in Hindi

कहानी : जूता कैसे आया

एक बार की बात है, एक राजा था और उसका एक बड़ा-सा राज्य था। एक दिन उसे देश घूमने का विचार आया और उसने देश भ्रमण की योजना बनाई और घूमने निकल पड़ा। जब वह यात्रा से लौट कर अपने महल आया। तो उसने अपने मंत्रियों से पैरों में दर्द होने की शिकायत की। राजा का कहना था कि मार्ग में जो कंकड़ पत्थर थे, वे मेरे पैरों में चुभ गए और इसके लिए कुछ इंतजाम करना चाहिए।

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कुछ देर विचार करने के बाद, उसने अपने सैनिकों व मंत्रियों को आदेश दिया कि देश की संपूर्ण सड़कें चमड़े से ढंक दी जाएं। और राजा का ऐसा आदेश सुनकर सब सदमें में आ गए। लेकिन किसी ने भी मना करने की हिम्मत नहीं दिखाई। और यह तो निश्चित ही था कि इस काम के लिए बहुत सारे रुपए की जरूरत थी। लेकिन फिर भी किसी ने कुछ नहीं कहा। कुछ देर बाद राजा के एक बुद्घिमान मंत्री ने एक युक्ति निकाली। और उसने राजा के पास जाकर डरते हुए कहा कि मैं आपको एक सुझाव देना चाहता हूँ।

अगर आप इतने रुपयों को अनावश्यक रूप से बर्बाद न करना चाहें, तो एक अच्छी तरकीब मेरे पास है। जिससे आपका काम भी हो जाएगा और अनावश्यक रुपयों की बर्बादी भी बच जाएगी। राजा आश्चर्यचकित था क्योंकि पहली बार किसी ने उसकी आज्ञा न मानने की बात कही थी। उसने कहा, बताओ क्या सुझाव है। मंत्री ने कहा कि पूरे देश की सड़कों को चमड़े से ढंकने के बजाय आप चमड़े के एक टुकड़े का उपयोग कर अपने पैरों को ही क्यों नहीं ढंक लेते। राजा ने अचरज की दृष्टि से मंत्री को देखा और उसके सुझाव को मानते हुए अपने लिए जूता बनवाने का आदेश दे दिया।

इस Moral Stories से शिक्षा

हमेशा ऐसे हल के बारे में सोचना चाहिए जो ज्यादा उपयोगी हो। जल्दबाजी में अप्रायोगिक हल सोचना बुद्धिमानी नहीं है। दूसरों के साथ बातचीत से भी अच्छे हल निकाले जा सकते हैं।

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कहानी : अहंकार

बहुत समय पहले की बात है| एक गाँव में एक मूर्तिकार ( मूर्ति बनाने वाला ) रहता था|  वह ऐसी मूर्तियाँ बनता था, जिन्हें देख कर हर किसी को मूर्तियों के जीवित होने का भ्रम हो जाता था| आस-पास के सभी गाँव में उसकी प्रसिद्धि थी, लोग उसकी मूर्तिकला के कायल थे| इसीलिए उस मूर्तिकार को अपनी कला पर बड़ा घमंड था| जीवन के सफ़र में एक वक़्त एसा भी आया जब उसे लगने लगा की अब उसकी मृत्यु  होने वाली है, वह ज्यादा समय तक जीवित नहीं रह पाएगा| उसे जब लगा की जल्दी ही उसकी मृत्यु  होने वाली है तो वह परेशानी में पड़ गया|

यमदूतों को भ्रमित करने के लिए उसने एक योजना बनाई| उसने हुबहू अपने जैसी दस मूर्तियाँ बनाई और खुद उन मूर्तियों के बिच जा कर बेठ गया| यमदूत जब उसे लेने आए तो एक जैसी ग्यारह आकृतियों को देखकर दांग रह गए| वे पहचान नहीं कर पा रहे थे की उन मूर्तियों में से असली मनुष्य कौन है| वे सोचने लगे अब क्या किया जाए| अगर मूर्तिकार के प्राण नहीं ले सके तो श्रथि का नियम टूट जाएगा और सत्य परखने के लिए मूर्तियों को तोड़ा गया तो कला का अपमान हो जाएगा|

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अचानक एक यमदूत को मानव स्वाभाव के सबसे बड़े दुर्गुण अहंकार को परखने का विचार आया| उसने मूर्तियों को देखते हुए कहा, “कितनी सुन्दर मूर्तियाँ बने है, लेकिन मूर्तियों में एक त्रुटी है| काश मूर्ति बनाने वाला मेरे सामने होता, तो में उसे बताता मूर्ति बनाने में क्या गलती हुई है”|

यह सुनकर मूर्तिकार का अहंकार जाग उठा, उसने सोचा “मेने अपना पूरा जीवन मूर्तियाँ बनाने में समर्पित कर दिया भला मेरी मूर्तियों में क्या गलती हो सकती है”| वह बोल उठा “कैसी त्रुटी”…झट से यमदूत ने उसे पकड़ लिया और कहा “बस यही गलती कर गए तुम अपने अहंकार में, कि बेजान मूर्तियाँ बोला नहीं करती”…

इस Moral Stories से शिक्षा

इतिहास गवाह है, अहंकार ने हमेशा इन्सान को परेशानी और दुःख के सिवा कुछ नहीं दिया |

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कहानी : राजा और मुर्ख बंदर

एक राजा था उसके पास एक बंदर था जो उसका सबसे अच्छा मित्र था। राजा का मित्र होने पर भी वह बंदर बहुत ही मुर्ख था। राजा का प्रिय होने के कारन उसे महल के हर जगह जाने की अनुमति थी बिना कोई रोक टोक। उसे शाही तरीके से महल में इज्ज़त दी जाती थी और यहाँ तक की वह राजा के कमरे में भी आराम से आ जा सकता था जहाँ राजा के गोपनीय सेवकों को भी जाना मना था।

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एक दिन दोपहर का समय था। राजा अपने कमरे में आराम कर रहे था और बंदर भी उसी समय पास के गद्दे में बैठ कर आराम कर रहा था। उसी समय बंदर ने देखा की एक मक्खी आकर राजा के नाक में बैठा। बंदर में एक तौलिया से उस मक्खी को भगा दिया। कुछ समय बाद वह मक्खी दोबारा से आ कर राजा के नाक पर आ कर बैठ गयी। बंदर नै दोबारा उसे अपने हांथों से भगा दिया।

थोड़ी देर बाद बंदर नें फिर से देखा वही मक्खी फिर से आकर राजा के नाक पर बैठ गयी है। अब की बार बंदर क्रोधित हो गया और उसने मन बना लिया की इस मक्खी को मार डालना ही इस परेशानी का हल है।उसने उसी समय राजा के सर के पास रखे हुए तलवार को पकड़ा और सीधे उस मक्खी की और मारा। मक्खी तो नहीं मरा परन्तु राजा की नाक कट गयी और राजा बहुत घायल हो गया।

इस Moral Stories से शिक्षा

मुर्ख दोस्तों से सावधान रहें। वे आपके दुश्मन से भी ज्यादा आपका नुक्सान कर सकते हैं।

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कहानी : शेर और ऊंट की कहानी

एक घने जंगल में एक शेर अपने तीन सहायकों के साथ रहता था- एक सियार , एक कौवा और एक तेंदुआ। जंगल के राजा के निकट होने के कारण, सहायकों को भोजन के लिए कभी सोचना नहीं पड़ता था। एक दिन, वे एक ऊंट को जंगल में घुमते देखकर आश्चर्यचकित हो गए, जो क्योंकि आमतौर पर ऊंट तो रेगिस्तान में रहते हैं। पूछताछ करने पर, उन्हें पता चला कि ऊंट ने अपना रास्ता खो दिया है और शेर ने उसे आश्रय दिया और उसे जंगल में रहने की जगह दी है।

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एक दिन, शक्तिशाली शेर हाथियों के साथ लड़ाई में घायल हो गया वह  शिकार करने में असमर्थ था, शेर और उसके सहायकों को भूख लगी थी। तीनों सहायकों ने सुझाव दिया कि उन्हें ऊंट को खा लेना चाहिए, लेकिन शेर ने उसे मारने से इनकार कर दिया क्योंकि यह ऊंट के साथ धोखा होता।

सियार, कौवा, और तेंदुए ने ऊंट को अपने रक्षक के लिए भोजन के रूप में प्रस्तुत करने की योजना बनाई जिसमें कौवा, तेंदुए और गधे तीनों ने एक-एक करके स्वयं को शेर को भोजन के रूप में पेश किया। उन सभी को शेर ने मार कर खाने से इनकार कर दिया। यह देखकर, ऊंट ने भी ऐसा ही किया और तुरन्त शेर के सामने खाना के रूप में पेश किया परन्तु तीनों धोखेबाज़ सहायक ने ऊंट पर उसी समय आक्रमण कर दिया और उसे मार दिया।

इस Moral Stories से शिक्षा

उन चालाक बुरे लोगों पर भरोसा रखना मूर्खता है जो शक्तिशाली या धनी लोगों को अपने लाभ के लिए घेरे हुए रहते हैं।

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कहानी : चिड़िया की परेशानी

एक चिड़िया थी वह बहुत उच उड़ती , इधर उधर चहचहाती रहती | कभी इस टहनी पर कभी उस टहनी पर फुदकती रहती |पर उस चिड़िया की एक आदतथी वह जो भी दिन में उसके साथ होता अच्छा या बुरा उतने पत्थर अपने पास पोटली में रख लेती और अकसर उन पत्थरो को पोटली से निकाल कर देखती अच्छे  पत्थरो को देखकर बीते दिनों में हुई अच्छी बातो को याद करके खुश होती | और खराब पत्थरो को देखकर दुखी होती |ऐसा रोज़ करती | रोज़ पत्थर इकठा करने से उसकी पोटली दिन प्रतिदिन भारी होती जा रही थी | थोड़े दिन बाद उसे भरी पोटली के साथ उड़ने में दिक्कत होने लगी | पर  उसे समझ नहीं आ रहा था की वह उठ क्यों नहीं पा रही |

कुछ समय और बीता, पोटली और भारी होती जा रही थी | अब तो उसका जमीन पर चलना भी मुश्किल हो रहा था | और एक दिन ऐसा आया की वह खाने पीने का इंतज़ाम भी नहीं कर पाती अपने लिए और अपने पत्थरो के बोझ तले मर गयी .

इस Moral Stories से शिक्षा

ऐसा ही हमारे साथ होता है जब हम पुरानी बातो की पोटली अपने साथ रखते है | अपने वर्तमान का आनंद लेने की जगह भूतकाल की बातो को ही सोचने में लगे रहते हैं | इस पल का आन्नद लीजिये |

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कहानी : हाथी क्यों हारा

एक बार एक व्यक्ति एक हाथी को रस्सी से बांध कर ले जा रहा था | एक दूसरा व्यक्ति इसे देख रहा था | उसे बढ़ा आश्चर्य हुआ की इतना बढ़ जानवर इस हलकी से रस्सी से बंधा जा रहा है दूसरे व्यक्ति ने हाथी के मालिक से पूछा ” यह कैसे संभव है की इतना बढ़ा जानवर एक हलकी सी रस्सी को नहीं तोड़ पा रहा और तुम्हरे पीछे पीछे चल रहा है|

हाथी के मालिक ने बताया जब ये हाथी छोटे होते हैं तो इन्हें रस्सी से बांध दिया जाता है उस समय यह कोशिश करते है रस्सी तोड़ने की पर उसे तोड़ नहीं पाते | बार बार कोशिश करने पर भी यह उस रस्सी को नहीं तोड़ पाते तो हाथी सोच लेते है की वह इस रस्सी को नही तोड़ सकते और बढे होने पर कोशिश करना ही छोड़ देते है |

इस Moral Stories से शिक्षा

हम भी ऐसी बहुत सी नकारात्मक बातें अपने दिमाग में बैठा लेते हैं की हम नहीं कर सकते | और एक ऐसी ही रस्सी से अपने को बांध लेते हैं जो सच में होती ही नहीं है |

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कहानी : कुत्ता जो विदेश गया

चित्रांगा नाम का एक कुत्ता था जो एक ऐसे शहर में रहता था जो कि अकाल से प्रभावित था। वहाँ लोगों को खाने के लिए कोई भोजन नहीं था जिसके कारण वह कुत्तों, मवेशियों या किसी अन्य जानवर को भोजन नहीं दे सकते थे। भोजन की कमी के कारण अन्य जानवरों के साथ कुत्ते भी भूक से तड़प चुके थे। चित्रांगा भूख को सहन नहीं कर पा रहा था और उसने यह महसूस किया कि इस स्थान पर रहने की कोई स्थिति दिखाई नहीं दे रही है। उसने भोजन और बेहतर परिस्थितियों की तलाश में एक विदेशी देश के लिए जाने का फैसला किया।

एक लंबी दूरी की यात्रा तय करने  बाद वह एक निश्चित शहर में पहुंचा। वहां उसने देखा एक अमीर घरेलू महिला ने लापरवाही के कारण अपने घर का दरवाजा खुला छोड़ा है वह घर में गया जहाँ उसे प्रचुर मात्रा में भोजन मिला। उसने लंबे समय से कुछ नहीं खाया था इसलिए उसने खूब दिल से पेट भर कर खाया फिर उसने चुपचाप छोड़ने का सोचा।

जल्द ही वह घर से बाहर आ गया उसे पड़ोस के अन्य कुत्तों ने देखा उन्हें एहसास हुआ कि वह उनके समुदाय का नहीं था और वे उसका  पीछा करने लगे चूंकि चितरंजन का पेट भरा हुआ था वह तेजी से नहीं चल सकता था और वह पकड़ा गया और उन कुत्तों ने उसे अपने तेज दाँतों से सारे शरीर में थोड़ा थोड़ा काट लिया।

वह किसी तरह बच कर वहाँ से भागा और सोचने लगा”अपने देश में शांति से जीना बेहतर है चाहे वह अकाल से प्रभावित क्यों  न हो मुझे अपने घर लौट जाना चाहिए”।

जब वह अपने देश लौट आया तब भूख से मरने वाले कुत्तों को उत्सुकता थी। उसके दोस्त और रिश्तेदार उससे वहां के बारे में पूछताछ करने के लिये उसके चारों ओर इकट्ठे हो गए, “कृपया हमें उस विदेशी देश के बारे में बताओ जहाँ तुम गये थे। वह कैसा है? लोग कैसे हैं वहाँ? क्या वहाँ बहुत सारा भोजन हैं?” कुत्ते ने कहा, “हे दोस्तों और रिश्तेदारों, मैं क्या कहूँ ? विदेशी देश में, महिलाएं लापरवाह हैं वे दरवाजों और खिड़कियां खुला छोड़ देती हैं । खाने के लिए बहुत सारा भोजन हैं। लेकिन आपकी जाति वाले और रिश्तेदार कभी कोई सहानुभूति नहीं दिखाएंगे। वे तुम्हें मौत के लिए पीड़ा देगा।”

इस Moral Stories से शिक्षा

अपने घर से अच्छा और कोई स्थान नहीं होता है। चाहे दुःख हो या मुश्किल अपने लोगों और घर से दूर कभी नहीं जाना चाहिए।

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दोस्तों आपको ये Moral stories in Hindi कैसी लगी उम्मीद है, आप लोगो को काफी पसंद आयी होगी। अगर आपको यह Moral stories in Hindi अच्छी लगी हो, तो कृपया ऐसे अपने दोस्तों के साथ जरूर शेयर करे।

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